अंतिम रात का भूत (भूतिया कहानी)

 अंतिम रात का भूत


एक रिक्त गली में, एक बड़ी औरत अपनी सिगरेट को धुंआधार बनाती हुई खड़ी थी। रात की चांदनी उसके डरावने चेहरे को और भी खतरनाक बना रही थी। गहरी आवाज़ ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया।


"कौन है?" वह दरवाजा खोलने की कोशिश करती है, पर दरवाजा सुचारूर खुलने का नाम नहीं ले रहा है। "कौन है?" वह फिर से पूछती है, पर उसे कोई जवाब नहीं मिलता। थोड़ी देर बाद, दरवाजा स्वयं ही खुल जाता है।


वह घर के भीतर देखने के लिए बाहर खड़ी थी, पर वहाँ कुछ नहीं था। सभी कुछ अद्भुत से अद्भुत लग रहा था, जैसे यहाँ कुछ भयानक होने वाला है। वह नीचे दरवाजे के पास गयी और देखने की कोशिश की कि उसने क्या खोया है।


धीरे-धीरे, वह एक छिपी हुई चिंतनी सुनने लगी, जैसे कोई उसे बुला रहा है। "आओ मेरे पास," वहाँ से आवाज़ आई। वह देवदार की ओर बढ़ी, पर उसे लगा कि कोई उसे नीचे बुला रहा है।


"कौन है?" वह पुनः पूछती है, पर कोई जवाब नहीं आता। वह बिल्कुल नीचे पहुँच गई, और फिर एक बड़े गुफा के सामने खड़ी हो गई।


गुफा के अंदर से आवाज़ आई, "तुम आ गए।" वह अपनी धार वाली आवाज़ में कहता है, "अब तुम्हारी बारी है यहाँ रहने की।"


औरत ने बाहर देखा, पर वहाँ कोई नहीं था। वह सिर्फ अपने आप से यह सवाल करती है कि क्या वह उसे सच में अपने सिर में सुन रही है? या फिर यह उसके डरावने ख्यालात की एक खोज है?


धीरे-धीरे, वह गुफा के अंदर बढ़ती है, और उसे लगता है कि वह कहीं निकल नहीं सकती। वह गुफा के अंदर और औंधी में घिरी जा रही है।


गुफा के अंदर से आवाज़ आती है, "तुम्हें यहाँ बंद किया गया है।" वह सुनने में आता है कि यह वही आवाज़ है जो उसे बुला रही थी। "तुम अब यहाँ तक सीमित हो गई हो।"


उसे अब यह समझ में आया कि यह सब भूतिया है। गुफा के अंदर वह खुद को खोती जा

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